17- ईशान में जल देवता किस प्रकार काम करते है जाने...
2. जल तत्व :- तो दूसरी चीज हमने क्या बताया यहा पर जल तत्ब है। यहा का जो मुख्य ऐलिमैन्ट है वो है जल तो जेसा कि हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी पर 75 प्रतिशत जल है। और अग्नि का एक भाग है। इसलिये जल अग्नि से जादा पॉवरफुल होता है जादा ताकतबर होता है।
-चूकिं शारीरक सुख (संभोग) का कारक है अग्नि, आपके अन्दर यदि अग्नि होगी तो आप शरीरक क्रिया में एन्टर करोगे और जल आपकी शरीरिक क्रिया की अग्नि को दवा देता है। उसे ठंण्डा कर देता है तो जल के एरिये में आकर आप अग्नि का काम नही कर सकते है। और यदि आप जल तत्व में आकर अग्नि का काम करोगे तो जल उस अग्नि को बुझा देगा और आपके सन्तान के योग को भंग कर देगा यदि सन्तान का योग बनेगा भी तो मिस्केरेज हो जायेगा यहा पर यदि सन्तान का योग बनता है और स्त्रि गर्भबती हो जाती है। तो उसका अबोर्सन हो जायेगा, क्योंकि इस दिषा (पूर्व-ईशIन व उत्तर-ईशIन) में इस कमरे में बच्चे का योग है ही नही। और यदि 100 में से एकाद को सन्तान होगी भी हो लडकी ही होगी, और दूसरी सन्तान भी होगी तो लडकी ही होगी, लडका नही होगा उनका बंस आगे नही चलेगा
-जल तत्व में सोने बाले को बच्चे का योग है ही नही, उस लडकी व लडके में कोई कमी नही है उस कपल में कोई कमी नही है। फिर भी उनको सन्तान नही हो है। क्योंकि उनको सादी के बाद जो व्यवस्था मिली है उसमें कमी हैं उस व्यवस्था के कारण उन्हे यह कष्ट उठाना पड रहा है। उस व्यवस्था के दोश के कारण उन्होने अपने जीवन के बहुमूल्य समय को बर्बाद कर दिया है। और जो परेषानी उठाई जो लोगो के ताने सुने वो तो फ्रि में मिले है।

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