7- वास्तु में गर्म व ठण्डी दिशा कोनसी होती है जाने...
वास्तु में पूर्व की तरफ मुह करके खडे हुऐ है तो आपका राईट भाग यानि दाया भाग साउथ साईड होट/गर्म भाग कहलाता है यह हमे होट फिलिंग देता है। और वाया भाग यानि उत्तर का भाग कोल्ड भाग कहलाता है। यह हमे कोल्ड फिलिंग देता है।
तो हम लोग जो नेचुरल वै में जो सांस लेते है इसमें हम अपने वाये नॉजल से जब सांस लेते है तो वह हमारी बॉडी को कूलिंग ईफेक्ट देता है और राईट/दाया नॉजल हमे होट ईफेक्ट देता है।
उदांहरण :- मान लो आप धर में अकेले है आपका टेम्परेचर बढा हुआ है तो आप दाये नाक से सांस लेना बन्द कर दो और वाई नाक से सांस लेना शुरू कर दोगे तो आपके यह सांस आपके हीट टेम्परेचर को डाउन कर देगा। यह हमारी बॉडी का नेचुरल सिस्टम है हमारी बॉडी ऑटोमेटिक अपने आप ही बॉडी को समय समय पर गर्म और ठण्डा करती रहती है। और हमारे शरीर के टेम्परेचर को मैन्टेन रखती है। और हमारी बॉडी कभी दाई नाज से सांस लेती है तो कभी बाई नाक से सांस लेती रहती है। इसी प्रकार हमारे शास्त्रो में बाई नॉज को चन्द्र का प्रतीक अर्थात चन्द्रनाडी और दाई नॉज को सूर्य का प्रतीक अर्थात सूयनाडी कहां गया है। इसी सांस के आवागमन में एक संन्धि काल भी होता है जव सांस दाये से बाये चैन्ज होती है तो बदलते समय दोनो नाक से सांस चलती है इसे संन्धि काल या शुषुम्नानाडी कहते है। तो बाई सांस में तरल पदार्थ व लाईट फूड पचा सकते है और दाई सांस में सोलिड फूड पचा सकते है।

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