नैऋत्य कोना
प्रष्न :- क्या नैऋत्य कोना दुर्गति का करक हैं?
क्योंकि नैऋत्य कोना दुर्गति का कारक है क्योंकि यह डाक्टरों को बहुत अच्छा विषनिस देता है ज्योंतिषियों को वास्तु शास्त्रियों को बहुत अच्छा विषनिस देता है यह कोना संघर्ष का कारक है। यदि आप हिन्दुस्तान में रहते हो तो आपको बहुत सारे पेसे कमाने है महिने के खर्चे के लिये, खुद के रिटायरमेन्ट के लिये बच्चो की पढाई के लिये, भारत में बच्चे जव तक पढाई करते है तव तक वह पेसे खर्च करते रहते है जवकि विदेष में ऐसा नही है वह पर 16 साल उम्र में ही लात मार देते है भगा देते है जाओ अव अपना जीवन जियो। लेकिन भारत मे ऐसा नही है यहा 30 साल 40 साल तक भी मॉ बाप बच्चो के लिये खर्च करते रहते है, यहा पर मॉं बाप कहते है कि बच्चो की सादी करना हमारी जिम्मेदारी है तो सादी के लिये पेसे कमाओं जवकि विदेष में ऐसा नही है, दुनिया भर के जो टेक्स है उनके लिये भी पेसे कमाने है, किसी पण्डित ने कोई उपाय बता दिया तो उसके लिये भी पेसे चाहिये, किसी वास्तु शास्त्री ने कुछ तोडफोड बता दिया तो उसके लिये भी पेसे कमाने है तो आपको इतने पेसे कमाने है कि बात मत पूछो तो ऐसे यदि संघर्ष वाला जीवन आ जाये गलत वास्तु बाला मकान आ जाये तो उससे अच्छा है कि नैऋत्य का मकान लो ही नही। इसलिये नैऋत्यमुखी मकान यदि सस्ता मिल रहा है तो भी नही लेना चाहिये। बाकी भगवान तो सवका है ही दो बक्त की रोटी तो देगा है।
नैऋत्य कोने का प्रवेष आपके सपोर्ट सिस्टम को तोड देता है यह मॉं बाप, भाई बहन, बेटे बहु इन सवसे मिलकर घर बनता है यदि नैऋत्य का प्रवेष है तो ये परिवार टूट जाता है विखर जाता है। यदि ऐसे घर में 4 भाई एक साथ रहते है लेकिन वे सव मन से एक दूसरे से दूर है उनमें एक दूसरे के प्रति वो प्रेम वो लगाव नही है। यह प्रवेष बहुत खतरनाक है। यह द्वार पडोसियों से बिजनिष पार्टनर से झगडे करवाता है 15 साल के बाद आपके सम्बन्ध खराब करवाता ही है। -दूसरा जव जव नैऋत्य का प्रवेष होगा तव तव आपका ईषान खराग होगा क्येंकि राहु सवसे पहले यही काम करता है कि वह घर के ईषान को खराब करता है, राहु एकदम से आपका नुकसान नही करता है, एकबार तो आपको खूब पैसा देगा, आपके घर में इतना सामान भर देगा कि आप सोचोगें कि इस कहां रखे, फिर आप सोचोगे कि ईषान में जो जगह खाली पडी है वहा रख देते है। अव राहु ने ईषान में गुरू को खराब कर दिया, अव राहु को मजा आयेगा अव आपकी दुर्गति चालू।

0 Comments: