Headlines
Loading...
117 - नैऋत्य कोने में आपको क्यों सोना चाहिये जाने विस्तार से

117 - नैऋत्य कोने में आपको क्यों सोना चाहिये जाने विस्तार से

 3. तो वहा पर एक उर्जा है इसलिये आपको सोना चाहिये दूसरा कारण यह है कि यहा पर राहु महाराज है, राहु केतु को शास्त्रो में सर्प कहा गया है जिसमें राहु को सर्प का मुह और केतु को सर्प की पूंछ कहते है। आपको नही पता कि राहु का मुंह कितना खुला हुआ है तो यदि आप डाईरेक्ट वहा पर सोने चले जाते हो और 7 वीक के नियम का पालन नही करते हो तो कहीं आप पूरे पूरे राहु के मुंह में तो नही चले गये हो इसलिये आपके अच्छे के लिये आपके भले के लिये 7 वीक के नियम का पालन करके ही वहा पर सोने जायें।

4. दूसरा कारण यह है कि नैऋत्य कोने में स्थिर राहु है यहा पर राहु महाराज बेठे हुऐ है, जो नेगेटिव उर्जा है वह तो चली जायेगी लेकिन राहुदेव तो यहा पर स्थिर है परमानेन्ट है यह उनका स्थान है वह तो यही पर ही रहेगें। आप यहा पर सोते है या नही सोते लेकिन राहु तो यहा पर स्थाई रूप से है ही, जेसे अग्नि कोने में चाहे रसोई है या नही लेकिन अग्नितत्व तो वहा है ही। जेसे ईषान में पूजाघर है या नही लेकिन गुरू तो वहा पर है ही। राहु केतु को शास्त्रो में सर्प कहा गया है जिसमें राहु को सर्प का मुह और केतु को सर्प की पूंछ कहा गया है। तो यहा पर जो स्थिर राहु है, उसका मुंह न खुले इसलिये भी आपको यहा पर सोना चाहिये। चूंकि आप घर के मुखियां है इस नाते आप अपने घर के सवसे बजनदार व्यक्ति है और जव आप यहा पर सोते हो तो राहु के मुंह पर सर्प के मुंह पर आपने एक बजन रख दिया है तो वह मुह अव नही खुलेगा। खुलने से मतलव यह है कि अव वह आपकी पूंजी को नही निगलेगा, यदि राहु रूपी सर्प का मुह खुल गया तो यह आपके पैसे को धीरे धीरे निगल जायेगा, आपके रिस्ते नातो को यारी दोस्ती को सम्बन्धो धीरे धीरे निगल जायेगा, इसलिये यहा पर सोना है जिससे यह मुंह न खुलने पाये।

5. तीसरा कारण यह है कि यहा पर पृथ्वी तथ्व है तो पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहां पर स्थिरता है तो स्थिरता कहा पर है पृथ्वी ग्रह पर, तो आप पृथ्वी ग्रह के अलावा किसी अन्य ग्रह पर जायेगें तो वहा पर आप स्थिर नही रह पायेगें, केवल पृथ्वी ग्रह ही एक ग्रह है जहा पर पैड पोधे पषु पक्षी स्त्रि पुरूष जमीन पर स्थिर खडे रह सकेत है क्योंकि यहा पर ग्रेविटेषन फोर्स है जिसकी ग्रेविटि के कारण आप पृथ्वी से चिपके रहते है। आप हवा में उडते नही है। स्पेष में अन्य किसी भी ग्रह पर यह व्यवस्था नही है।

6. तो पृथ्वी तत्व कहां है नैऋत्य में और हम पृथ्वी पर रहते है तो हमे अपने मन क्रम बचन व भावनाओं से स्थिर रहना चाहिय, तो यदि आपको स्थिर रहना है तो आपको नैऋत्य में सोना चाहिये, अपने ऑफिस में नैऋत्य में ही बेठना चाहिये तो जहा जहा आपके वर्कप्लेष है वहा वहा पर आपको नैऋत्य में ही बेठना चाहिये ताकि गुरू की दृष्टि आप पर सदेव बनी रहे और पडती रहे। ताकि सांप का मुह सदेव बन्द रहे

7. चोथा कारण वास्तु पुरूष के पैर नैऋत्य कोने में है। हम जो भी काम करते है वो अपने पैरो के बल ही करते है तो पांव कहां पर है वो नैऋत्य में है तो इसलिये भी आपको नैऋत्य में ही सोना है और नैऋत्य में ही कार्यस्थल में बेठना है।

यदि आप नैऋत्य में नही सो रहे हो तो 15 साल बाद आपको मालूम हो जायेगा कि आप जीवन में प्लस नही हुऐ हो वल्कि माईनस हुऐ हो ऐसा नही है कि आप केवल धन के मामले मे ही माईनस हुऐ हो वल्कि आप जीवन के हर क्षेत्र में माईनस हुऐ हो आप हेल्थ, यारी दोस्ती में, रिस्तेदारी में, समाज में हर क्षेत्र आप माईनस होगें यदि आप नैऋत्य में नही सो रहे हो तो। इसलिये नैऋत्य में सोना बहुत आवष्यक हैं चाहे आप दक्षिण में सिर रख कर सोये या पष्चिम में सिर रख कर सोये लेंकिन सोये जरूर।


0 Comments: