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                                                      नैऋत्य में लेटबाथ 


- यदि नैऋत्य में लेटबाथ है जव आपने यहा पर लेटबाथ बना दिया है तो आपने यहा पर अपने सोने की व्यवस्था को विल्कुल खत्म कर दिया है, रसोई मे तो कोई न कोई व्यवस्था करके सो भी सकते है लेकिन यहा तो विल्कुल भी नही सो सकते है। तो यह मेरे लिये बडे दुख की बात होगी कि मै अपने क्लाइन्ट को वह पॉवरजॉन नही दिला पा रहा हूं जिसकी उसे जरूरत है।

यदि यहा पर लेटबाथ है तो ऐसे घर में रहने बालो की स्थिरता चली जाती है। वह अपने जीवन में स्थिर नही रह पाते है। आपकी प्रगति रूक जायेगी। यदि किसी मकान में नैऋत्य में लेटबाथ है तो वहा पर रहने बाले व्यक्ति यह नही कह सकते है कि में स्थिर हूं, या मुझे पैसो की तंगी नही है।

यदि नैऋत्य में लेटबाथ है तो इसका मतलव आप यहा पर नही सो रहे है और यहा पर क्या आ गया जल तत्व आ गया, यहा लेटबाथ की बजह से यहा पर पानी आ गया, जवकि जल कहां होना चाहिये पानी ईषान में होना चाहिये, जहा पर पानी की एक बून्द भी नही होनी चहिये थी, वहा पर आपने लेटबाथ बना कर पानी को स्थापित कर दिया है, तो आपने अपने घर में विलकुल विपरित व्यवस्था कर दी है। और यहा पर कोन है राहुदेव और राहु एक दानव है, यह कोना दानवो का है और दानव कहां रहते है पाताल लोक में और पाताल में क्या है पाताल में पानी है। और जव आपने नैऋत्य में पानी की व्यवस्था कर दी है, तो आपने दानवो के लिये एक दरवाजा दे दिया है, दानवो के लिये एक एक घर दे दिया है, उन्हे अपने घर में आने के लिये एक रास्ता दे दिया है। तो अव वो यहा पर रहना शुरू कर देते है। और जेसे ही वह यहा पर रहना शुरू करते है, तो दानवो की प्रकृति क्या है दुर्गति देना उनकी कर्मक्षे़त्र ही परेषानी देना है, उनका काम ही परेषान करना है, जेसा कि हमने पहले बताया कि दानवो को परेषान करने में परेषानी देने में दुर्गति देने में मजा आता है, उनकी प्रकृति ही ऐसी है और वो अपनी इस प्रकृति को छोड नही सकते है। तो जव आपने उन्हे उपने घर में जगह दे दी है, तो वह आपको जीवन के हर क्षेत्र में परेषानी रूकावट ही देगें। 

शास्त्र का कथन है कि नैऋत्य स्थान जितना सूखा होगा जितना ड्राई होगा उतना ही अच्छा रहता है इसलिये हम मकान में पानी का ढलान देते है उसे नैऋत्य से इषान की ओर, पष्चिम से पूर्व की ओर देते है जिससे के पानी नैऋत्य में दक्षिण में पष्चिम में ठहरे ही नही। यदि यहा पर पानी इकठ्ठा होगा या पानी यहा पर रहेगा तो आपके धर में परेषानियां चालू हो जायेगी।

यह नियम इतन स्ट्रोंग है यह 7 साल के बाद जाग्रत हा जाता है और आपको आर्थीक परेषानी देगा देगा और देगा ही।


यदि आपने नैऋत्य कोने में लेटबाथ बना दिया है तो आपने राहु की एनर्जी को वहा पर बढा दिया है, यह आपके घर में नेगेटिविटी जादा बढा देगा। आपके रिलेषन खराब हो जायेगें, बिमारियां सही नही होगीं क्योंकि राहु एक छाया ग्रह हे यह तो डाक्टर बिमारी का पता ही नही लगा पाते है डाईग्नोस ही नही कर पाते है। कि बिमारी क्या हैं।


वास्तु के जो नियम है वह युगो से चले आ रहे है और वो शुरू से आज तक वही के वही है और उनके रिजल्ट भी वही के वही है।


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