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नैऋत्य में झीना

यदि नैऋत्य में झीना है जव आपने यहा पर झीना बना दिया है तो आपने यहा पर अपने सोने की व्यवस्था को खराब कर दिया है, आप यहा पर सो नही सकते है। यदि यहा पर झीना है तो ऐसे घर में रहने बालो की स्थिरता चली जाती है। वह अपने जीवन में स्थिर नही रह पाते है। आपकी प्रगति रूक जायेगी। यदि किसी मकान में नैऋत्य में झीना है तो वहा पर रहने बाले व्यक्ति यह नही कह सकते है कि में स्थिर हूंॅ, इसलिये नैऋत्य में झीना नही बनाना चाहिये।

लेकिन कई वास्तुषास्त्री नै़ऋत्य में झीना को सही मानते है, क्योंकि वह यहा पर बजन रखवा कर राहु के स्थान को भारी करना चाहते है राहु को दवाना है, उन्होने यहा पर बजन की परिभाषा को गलत समझ लिया है, यहा पर बजन का मतलव मिट्टी का ढेर लगाना नही है, वल्कि बजन का मतलव घर के बजनदार व्यक्ति से है जिस पर घर की जिम्मेदरीयों का बजन हो घर की हर समस्या का बजन हो, और घर का मुखिया अपने घर का सवसे बजनदार व्यक्ति होता है और इसी का बजन वह बजन है जो राहु के मुख को खुलने नही देगा, यही वो बजन है जो सर्प के मुंह को खुलने नही देगा, यही वो व्यक्ति है जो गुरू से पॉवर लेकर और नैऋत्य की स्थिरता को लेकर सवसे जादा बजनदार व्यक्ति बन जाता है। लेकिन कुछ लोगो ने बजन की परिभाषा को गलत समझ कर घरों मे गलत व्यवस्था करवा कर उस घर के वास्तु को खराब कर दिया है। वो यह भूल गये है कि 

यहा पर वास्तुपुरूष के पैर है, 

यहा पर पृथ्वी तत्व है, 

यहा पर गुरू दृष्टि है।


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