Vaastu parichaya
2- वास्तु देवता का मानव शरीर के रूप में परिचय क्या है जाने...
मानव शरीर के रूप में वास्तु की परिभाषा :- वास्तु पुरूश कोन है वास्तु पुरूश एक मानव शरीर है जो आपके मकान में उल्टे लेटे हुऐ है तो जिस प्रकार भगवान कण कण में बास करते है। उसी प्रकार वास्तु पुरूश भी हर छोटे बडे भूखण में मकान में दुकान में ऑफिस आदि में उल्टे लेटे हुऐ हैं तो आपका मकान भी एक मानव शरीर है। आपकी दुकान भी एक मानव शरीर है। आपका ऑफिस भी एक मानव शरीर है। यदि हम वास्तु पुरूश के शरीर की अहमियत नही समझेगें, उसकी बनावट को उसके अंग कहां कहां पर है। उनके स्थान को नही समझेंगें जव तक आप वास्तु शास्त्र को नही समझ सकते है। वास्तु पुरूश के शरीर को एक मानव शरीर मान कर, उसका अध्ययन करना ही वास्तु शास्त्र कहलाता है

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