Vaastu parichaya
3- वास्तु देवता का पंच तत्वों के रूप मेंं परियच क्या है जाने...
पंच तत्वो के अनसुर वास्तु की परिभाषा :- पांचो तत्व आपस में एक दूसरे तत्व को क्रियेट करते है। डिस्ट्रक्शन करते है और उन्हे बैलेन्स करते है। अर्थात एक दूसरे तत्व को कन्ट्रोल करने का कार्य करते है। (तो साईकिल ऑफ क्रियेशन और साईकिल ऑफ डिस्ट्रक्शन ये दोनो ही घटनाऐं एक साथ घटित होती है जिस प्रकार लाईफ बढ रही है या घट रही है ये दोनो ही घटनाऐं एक साथ घटित हो रही है वस देखने का नजरियां है।) तो साईकिल इसी प्रकार बेलेन्स रूप में अपना काम करती रहती है यदि इनमें से कोई भी जरा सा बढ गया या घट गया तो इनबेलेन्स आ जायेगा, और जव ईनबैलेन्स आयेगा तो वो डिस्टर्ब हो जायेगा। तो पंच तत्वो का ईनबैलेन्स होना ही डिस्ट्रक्शन का कारण बनता है। इस इनबैलेन्स को कन्ट्रोल करना ही वास्तु शास्त्र है।

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