Headlines
Loading...
115 - नैऋत्य कोना इतना जादा पॉवरफुल कोना क्यों है?

115 - नैऋत्य कोना इतना जादा पॉवरफुल कोना क्यों है?

 नैऋत्य कोना सवसे पॉवनफुल कोना है तो नैऋत्य कोना इतना जादा पॉवरफुल कोना क्यों है?

यह सवसे जादा पॉवरफुल कोना इसलिये है क्योंकि ईषान में जो गुरू बेठे हुऐ है इनकी जो दृष्टि है वह तीरछी है इसलिये इनकी दृष्टि सीधी नैऋत्य कोने पर पडती है। और जेसा कि हमारे शास्त्रों में विधित है गुरू की दृष्टि जिस जहा पर पड जाये या जिस पर पड जाये उसका जीवन निहाल हो जाता है उसका जीवन सरल हो जाता है। उस अपनी समस्याओं का परेषानीयों को समाधान मिल जाता है, यही से अपको समस्याओं से लडने की ताकत मिलेगी, प्रगति करने के लिये जिस ताकत की जरूरत पडती है वह हमे यही मिलती है इसलिये यहा पर हमे सोना चाहिये। यदि हम यहा पर नही सोते है तो समस्याऐ हम पर हावी हा जायेगीं। या यह कहे कि उसके प्रगति का मार्ग खुल जाता है।

सलिय यहा पर आपको सोना चाहिये इसके निम्न कारण है। :-

1. मान लों कि आप यहां पर नही सो रहे हो तो आपके स्थान पर दूसरी कोनसी चीज है जो यहा पर निवास करती है तो हम कहते है कि राहु महाराज यहा पर है, दानवो के राजा राहुदेव यहा पर विराजमान है। और यदि यहा पर कोई नही सोता है तो यहा पर ड्रोईंगरूम है या रसोई है या लेटबाथ है या स्टोर है, एसी कोई भी व्यवस्था है सिवाय बेडरूम के तो जाहिर सी बात है कि यहा पर कोई नही सो रहा है, यदि कोई नही सो रहा है तो राहु महाराज तो यहा है ही, तो गुरू की दृष्टि किस पर पड रही है राहु देव पर या ताडकासुर पर तो ताडकासुर को भी तो भगवान ने निहाल किया था और बहुत सारी शक्तियां दी उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर तो असुरों को भगवान ने शक्यिं दी उनकी मनोकामना पूर्ण की उनकी इच्छा के अनुसार उन्हे बरदान दिये, क्योंकि भगवान की नजरो में, गुरू की नजरों में सव एक बरावर होते है चाहे वो मानव हो या दानव हो, उनकी दृष्टि जिस पर पडेगी या उनका सानिद्य जिसे प्राप्त होगा वह उसे निहाल करेगें ही। 

2. तो यदि कोई किसी को इतनी सव कुछ दे रहा हो उसकी इच्छाओं को पूण कर रहा हो तो उसके प्रति लेने वाले को सदेव आभारी रहना चाहिये। लेकिन असुरो ने क्या किया असुरो ने उन्ही से आषीर्वाद प्राप्त करके अपनी शक्तियों का बढाया और उन्हे परेषान करना शुरू कर दिया उन्ही को मारने का प्रयास करते रहे जिनसे इन्हे सवकुछ मिला, असुरों ने ऐसा क्यों किया क्योंकि असुरो की ऐसी ही प्रकृति है
उनका स्वभाव ही ऐसा है कि वह सदेव दुर्गति ही प्रदान करेंगें इनके जो कार्यक्षेत्र है वह दुर्गति देने वाले है। यह अपने उस स्वभाव को उस प्रकृति को छोड नही सकते है। तो यहा राहु महाराज इस घर में रहने बालो को दुर्गति ही देंगे।
तो यदि ऐसा कोई मकान जिसमें नैऋत्य में कोई सालो साल से नही सोता है या वहा पर बेडरूम की या सोने की कोई व्यवस्था ही नही है, तो उस घर की प्रगति के मामले में परेषानियां ही आयेगी, उन लोगो की प्रगति नही होगी, वे लोग संघर्ष में ही अपना जीवन जियेगें, संघर्ष करते करते कमायेंगें और संघर्ष करते करते ही उस का उपयोग करेगें। कहने का मतलव है कि प्रगति नही हो रही केवल उतना ही मिल रहा है जिससे जीवन ही रहे है।---

0 Comments: