नैऋत्य कोना सवसे पॉवनफुल कोना है तो नैऋत्य कोना इतना जादा पॉवरफुल कोना क्यों है?
यह सवसे जादा पॉवरफुल कोना इसलिये है क्योंकि ईषान में जो गुरू बेठे हुऐ है इनकी जो दृष्टि है वह तीरछी है इसलिये इनकी दृष्टि सीधी नैऋत्य कोने पर पडती है। और जेसा कि हमारे शास्त्रों में विधित है गुरू की दृष्टि जिस जहा पर पड जाये या जिस पर पड जाये उसका जीवन निहाल हो जाता है उसका जीवन सरल हो जाता है। उस अपनी समस्याओं का परेषानीयों को समाधान मिल जाता है, यही से अपको समस्याओं से लडने की ताकत मिलेगी, प्रगति करने के लिये जिस ताकत की जरूरत पडती है वह हमे यही मिलती है इसलिये यहा पर हमे सोना चाहिये। यदि हम यहा पर नही सोते है तो समस्याऐ हम पर हावी हा जायेगीं। या यह कहे कि उसके प्रगति का मार्ग खुल जाता है।
इसलिय यहा पर आपको सोना चाहिये इसके निम्न कारण है। :-
1. मान लों कि आप यहां पर नही सो रहे हो तो आपके स्थान पर दूसरी कोनसी चीज है जो यहा पर निवास करती है तो हम कहते है कि राहु महाराज यहा पर है, दानवो के राजा राहुदेव यहा पर विराजमान है। और यदि यहा पर कोई नही सोता है तो यहा पर ड्रोईंगरूम है या रसोई है या लेटबाथ है या स्टोर है, एसी कोई भी व्यवस्था है सिवाय बेडरूम के तो जाहिर सी बात है कि यहा पर कोई नही सो रहा है, यदि कोई नही सो रहा है तो राहु महाराज तो यहा है ही, तो गुरू की दृष्टि किस पर पड रही है राहु देव पर या ताडकासुर पर तो ताडकासुर को भी तो भगवान ने निहाल किया था और बहुत सारी शक्तियां दी उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर तो असुरों को भगवान ने शक्यिं दी उनकी मनोकामना पूर्ण की उनकी इच्छा के अनुसार उन्हे बरदान दिये, क्योंकि भगवान की नजरो में, गुरू की नजरों में सव एक बरावर होते है चाहे वो मानव हो या दानव हो, उनकी दृष्टि जिस पर पडेगी या उनका सानिद्य जिसे प्राप्त होगा वह उसे निहाल करेगें ही।

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